
दुर्ग। समस्याओं का हल निकल आता श्रीमद् भागवत कथा के सुनने मात्र से ही जीवन की अनेक है। हमें अपने गुरूजनों से कुछ मांगने के स्थान पर उनकी शिक्षा के अनुरूप कार्य करने का प्रयास करना चाहिए। ये उद्गार सिलयारी, रायपुर से पधारे पं. नरेन्द्र नयन शास्त्री ने सतनाम भवन, दुर्ग में चल रही आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा पुराण का वाचन करते हुए व्यक्त किये। 04 जनवरी से 12 जनवरी तक चलने वाले इस भागवत कथा में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शालेय शिक्षक तथा गणमान्य नागरिक हिस्सा ले रहे हैं। प्रतिदिन दोपहर 02 बजे से रात्रि 09 बजे तक चलने वाली भागवत कथा में पं. शास्त्री अध्यात्म का ज्ञान रोचक तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं।
कथा आयोजन समिति के मुख्य जजमान परीक्षित डॉ. अनिल कश्यप तथा श्री संजय यादव ने बताया की चाय वाले तथा चांवल वाले बाबा के रूप में प्रसिद्ध पं. नरेन्द्र नयन शास्त्री किसी भी व्यक्ति के घर से लाये हुए एक मुट्ठी कच्चे चावल को देखकर भविष्यवाणी करते है। यही कारण है की प्रतिदिन रात्रि 11.00 बजे तक भक्तों का दरबार कसारीडीह, दुर्ग स्थित सतनाम भवन में लगा रहता है। वामन अवतार पर सारगर्भित व्याख्या करते हुए पं. शास्त्री ने उसकी प्रासंगिकता को विस्तार से समझाया। भक्तिरस, उल्लास एवं आध्यात्मिक आनंद से सराबोर श्रद्धालुओं को वामन अवतार के विषय में महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ।
डॉ. अनिल कश्यप के अनुसार मधुर भक्ति संगीत व बीच-बीच में भगवान श्री कृष्ण के भजनों को पं. शास्त्री एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुतिकरण से उपस्थित श्रद्धालु आध्यात्म की दुनिया में खो जाते है। भागवत कथा प्रेम, भक्ति एवं दिव्य आनंद का जीवंत उत्सव बन गई है। मुख्य जजमान श्री संजय यादव ने बताया देवता भी कथामृत के लिये तरसते है ऐसा पं. शास्त्री जी का कहना है। जब राजा परीक्षित के जीवन के सातदिन शेष थे तब स्वर्गलोक से देवता उनके पास आये और विनयपूर्वक अमृत के बदले श्रीमद्भागवत कथा का प्रस्ताव रखा। देवताओं की यह इच्छा थी की शुकदेव जी के श्रीमुख से परीक्षित राजा कथामृत का पान करें। पं. शास्त्री के अनुसार अमृत केवल शरीर हेतु लाभदायक है परन्तु कथामृत भक्ति का उदय एवं ज्ञान का प्रकाश बढ़ाता है। इसी गहन सत्य को जानकर राजा परीक्षित ने अमृत को ठुकराकर कथामृत को स्वीकार किया।
अंतिम समय में देहत्यागने के दौरान भगवान का स्मरण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पं शास्त्री के अनुसार भगवान की कृपा पाने के लिये गुरू के चरणों में जाना आवश्यक होता है। कथा के अगले चरण में राज जन्म कथा तथा कृष्ण जन्म, श्रीकृष्ण लीला, गोवर्धन लीला एवं छप्पन भोग, बैकुठ दर्शन तथा रूकमणी विवाह, द्वारिका दर्शन, सुदामा चरित्र, कृष्ण उधव संवाद, फुलो की होली एवं अंतिम दिन तुलसी वर्षा सहस्त्रधारा, हवन तथा ब्राम्हण भोज आदि का आयोजन किया जायेगा। श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन में नर्मदेश्वर महादेव समिति, दुर्ग के सदस्य डॉ. अनुपमा कश्यप, डॉ. अभिनेष सुराना, श्रीमती वंदना यादव, श्री रोशन देशमुख, श्री टीकम यादव, श्री अशोक यादव, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. हरीश कश्यप, डॉ. शशि कश्यप, डॉ. अनिल मिश्रा, डॉ. अलका मिश्रा, डॉ. के. पद्मावती श्रीमती शैलतिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
