रुतबा और सत्ता के दुरुपयोग से किसी निर्दोष को कैसे फंसाया जा सकता है, इसका चौंकाने वाला उदाहरण दुर्ग-भिलाई क्षेत्र से सामने आया है। करीब 33 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शहर के व्यापारी प्रदीप जैन को आत्महत्या और एनडीपीएस एक्ट के मामलों में पूर्णतः दोषमुक्त करार दिया गया है। इतना ही नहीं, कोर्ट के निर्देश पर उन्हें क्षतिपूर्ति राशि भी मिलेगी, जिसकी वसूली तत्कालीन थाना प्रभारी (टीआई) एमडी तिवारी से की गई है।
993 दिन जेल में रहे निर्दोष व्यापारी
बिना किसी दोष के प्रदीप जैन को 993 दिन जेल में बिताने पड़े। वर्ष 1992 में प्रदीप जैन भिलाई सेक्टर क्षेत्र में सड़क किनारे दुकान चलाते थे और रुआबांधा इलाके में उनकी दूध डेयरी थी। इसी दौरान उनके छोटे भाई की पत्नी ने आत्महत्या कर ली। मामले की जांच भिलाई नगर थाना पुलिस कर रही थी। आत्महत्या प्रकरण में प्रदीप जैन सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया।
एक ही दिन दो मामलों में गिरफ्तारी
आरोप है कि सीएसपी के निर्देश पर तत्कालीन सुपेला टीआई एमडी तिवारी और पुलिसकर्मी आरके राय ने प्रदीप जैन को दुर्ग से पकड़ा और आरोप लगाया कि उनकी जेब से अफीम बरामद हुई है। पुलिस का दावा था कि वे अफीम बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे थे। इस तरह एक ही दिन में प्रदीप जैन को आत्महत्या और एनडीपीएस एक्ट—दोनों मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
कोर्ट ने माना—दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई
दुर्ग कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों मामलों में प्रदीप जैन को बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि व्यापारी को झूठे और दुर्भावनापूर्ण मामलों में फंसाया गया। इसके बावजूद विभागीय कार्रवाई के नाम पर टीआई तिवारी पर मात्र एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
हाईकोर्ट से मिली राहत, क्षतिपूर्ति का आदेश
जेल से रिहा होने के बाद प्रदीप जैन ने बिलासपुर हाईकोर्ट में क्षतिपूर्ति की अपील की। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि पुलिस ने दुर्भावनापूर्वक कार्रवाई की है। कोर्ट ने आदेश दिया कि व्यापारी को 5 लाख रुपये ब्याज सहित क्षतिपूर्ति दी जाए। यह राशि या तो राज्य सरकार दे या फिर दोषी टीआई से वसूली कर दी जाए।
संपत्ति नीलामी से पहले टीआई ने जमा की राशि
हाईकोर्ट के आदेश के बाद वसूली का प्रकरण दुर्ग कलेक्टर कार्यालय में पेश हुआ। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बिलासपुर कलेक्टर को टीआई की संपत्ति चिन्हित कर नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। तहसीलदार स्तर पर जांच भी की गई, लेकिन संपत्ति कुर्क और नीलामी से पहले ही टीआई एमडी तिवारी ने 13.40 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट तहसीलदार के पास जमा कर दिया। यह राशि 17 दिसंबर को न्यायालय में जमा करा दी गई।
जल्द मिलेगी क्षतिपूर्ति राशि
व्यापारी के वकील सुधीर पांडे ने बताया कि कोर्ट के आदेशानुसार अब क्षतिपूर्ति की राशि प्रदीप जैन को शीघ्र प्रदान की जाएगी।
यह फैसला न सिर्फ एक निर्दोष व्यापारी के लिए न्याय की जीत है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि सत्ता और पद का दुरुपयोग कर किसी को झूठे मामलों में फंसाने वालों को अंततः जवाबदेह ठहराया जा सकता है।


