शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय ,दुर्ग के हिन्दी विभाग में हिन्दी साहित्य परिषद का उद्घाटन किया गया

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दुर्ग। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भुवाल सिंह ठाकुर(सहा. प्राध्यापक हिंदी, शासकीय नागार्जुन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रायपुर ) रहे ।
हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिनेष सुराना ने स्वागत भाषण देते हुए परिषद गठन की प्रक्रिया व उद्देश्य से अवगत कराया । परिषद में मनोनीत होने वाले सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा कि परिषद गठन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता का विकास , दायित्व का सफल सम्पादन , रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन और टीम भावना से सामूहिक सामंजस्य द्वारा व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होगा ,जिससे वे अपने दायित्व का निर्वहन निष्ठापूर्वक करेंगे ।
महाविद्यालय के प्राचार्य एवं साहित्य परिषद के संरक्षक डॉ. अजय सिंह ने मनोनीत पदाधिकारियों की घोषणा की जिसमें अध्यक्ष पद पर राजा पटेल , उपाध्यक्ष घनश्याम, सचिव दावेंद्र, सहसचिव ईशा साहू , कार्यकारिणी सदस्य छोटेलाल, सत्यप्रकाश, हेमलता, गोकुल राम , प्रीति सिंहा, नीलेश, करिश्मा देवांगन , डमलेश्वरी , रोशनी द्विवेदी,यामिनी चतुर्वेदी, रेवाराम साहू मनोनीत किये गये । उन्होंने पदाधिकारियों को उनके दायित्व से अवगत कराते हुए कहा कि साहित्य संवेदना का विस्तार है ।

मनुष्य साहित्य से जुड़े रहकर ही जीवंत रहता है । साहित्य के विद्यार्थी होने के नाते साहित्य से जुड़कर जीवन में मानवीय संवेदना का विकास करें ।
तत्पश्चात अध्यक्ष राजा पटेल ने कहा हिंदी केवल एक भाषा नहीं हमारी पहचान और स्वाभिमान का विषय है। अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी का वहन करने का शपथ लेते हुए नेट/सेट की कक्षा का आयोजन, रोजगारोंन्मुखी व्याख्यान आयोजन की मांग रखी गई।
मुख्य अतिथि डॉ. भुवाल सिंह ठाकुर ने मनोनीत पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि महाविद्यालयीन जीवन नेतृत्व क्षमता , रचनात्मक क्षमता के विकास के लिए बहुत अच्छा समय होता है । विद्यार्थियों को इस समय का भरपूर उपयोग करना चाहिए । मोबाइल आज विद्यार्थियों को किताबों से दूर कर सोचने समझने और जानने की शक्ति को नष्ट कर उनके बहुमूल्य समय को भी खराब कर रहा है । जीवन में और आचरण में लोकतांत्रिक होना चाहिए। लोकतांत्रिक होने का अर्थ जिसमें यह सोच रहे कि सारा आकाश तुम्हारा है।हिंदी का सांस्कृतिक बोध पहले मूलभूत पुस्तकों एवं संदर्भ पुस्तकों का चयन जरूरी है।विद्यार्थियों में संग्रह और त्याग का होना चाहिए इसके उदाहरण में उन्होंने सूप के कार्य को बताया जैसे सूप फटकने से अच्छी वस्तु अंदर और उसका खराब वस्तु बाहर हो जाता है।उन्होंने कहा हिंदी का आचरण करेंगे उतनी ही भाषाई समृद्धि आती है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ अम्बरीष त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. पद्मावती ( विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र ) , डॉ. ए.के. खान , डॉ. सतीश सेन, डॉ. प्रदीप जांगड़े , प्रो. जैनेन्द्र दीवान , डॉ. रजनीश उमरे , डॉ. ओम कुमारी देवांगन , डॉ. रमणी चन्द्राकर , डॉ शारदा सिंह, डॉ. लता गोस्वामी , शोधार्थीगण, स्नातकोत्तर एवं स्नातक हिन्दी के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे । कार्यक्रम का सफल संचालन स्नातकोत्तर के विद्यार्थी घासीदास द्वारा तथा आभार हिंदी परिषद के सचिव दावेंद्र ने किया ।

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