नर्सिंग स्टूडेंट्स के लिए गुड न्यूज : INC ने 2025-26 सत्र के लिए एडमिशन की अंतिम तिथि बढ़ाई, अब 31 दिसंबर तक हो सकेगा दाखिला

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नर्सिंग कोर्स में प्रवेश लेने के इच्छुक छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए देशभर के सभी नर्सिंग पाठ्यक्रमों में दाखिले की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दी है। इससे हजारों खाली सीटों पर प्रवेश का रास्ता खुल गया है।

रायपुर 25 दिसंबर 2025। इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए ANM, GNM, B.Sc. नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बी.एससी. नर्सिंग (PBBSc-N) और एम.एससी. नर्सिंग (MSc-N) पाठ्यक्रमों में दाखिले की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब देशभर के सभी नर्सिंग संस्थानों में 31 दिसंबर 2025 तक प्रवेश लिया जा सकेगा। इससे पहले यह अंतिम तिथि 30 नवंबर 2025 निर्धारित की गई थी।

INC द्वारा यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। काउंसिल की ओर से जारी नोटिफिकेशन नंबर 23/2025 के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में 31 दिसंबर तक प्रवेश की अनुमति दी थी। इसके बाद 18 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के नर्सिंग कॉलेजों के लिए भी समान रूप से 31 दिसंबर 2025 तक एडमिशन की समय-सीमा बढ़ाने का निर्देश दिया।

इन न्यायिक आदेशों के बाद समानता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने यह फैसला लिया है, ताकि किसी भी राज्य या संस्थान के छात्रों के साथ भेदभाव न हो और अधिक से अधिक सीटें भरी जा सकें।

निजी नर्सिंग कॉलेजों की मांग: पर्सेंटाइल कटऑफ खत्म हो

इस फैसले के बीच निजी नर्सिंग महाविद्यालय संघ ने राज्य सरकार से एक बार फिर मांग की है कि प्री नर्सिंग टेस्ट (PNT) में लागू पर्सेंटाइल कटऑफ को समाप्त कर इसे शून्य पर्सेंटाइल किया जाए। साथ ही प्रवेश की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने की मांग भी की गई थी, जिसे अब आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है।

इस संबंध में संचालक, चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा इंडियन नर्सिंग काउंसिल, नई दिल्ली को पत्र भेजा गया है। पत्र में यह तर्क दिया गया है कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बहुल राज्य है, जहां छात्रों के लिए उच्च पर्सेंटाइल स्कोर करना व्यवहारिक रूप से कठिन होता है। ऐसे में सख्त कटऑफ के कारण बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं।

हर साल दोहराई जाती है वही स्थिति

छत्तीसगढ़ में नर्सिंग प्रवेश को लेकर यह स्थिति पिछले कई वर्षों से लगातार देखी जा रही है। हर साल करीब 30 हजार से अधिक छात्र प्री नर्सिंग टेस्ट में शामिल होते हैं, लेकिन इसके बावजूद नर्सिंग कॉलेजों की सीटें पूरी तरह नहीं भर पातीं। नतीजतन, कम पर्सेंटाइल या परीक्षा में असफल छात्रों को भी प्रवेश दिलाने के लिए दबाव की स्थिति बनती रही है।

इस बार भी वही पैटर्न देखने को मिला। कॉलेज संचालकों की मांग पर न केवल पर्सेंटाइल कम करने बल्कि प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाने का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट और INC के फैसले के बाद मुहर लग गई है।

हजारों सीटें अब भी खाली

प्रदेश में नर्सिंग की कुल 7,811 सीटें हैं। पहले और दूसरे चरण की काउंसलिंग के बाद भी 4,147 सीटें खाली रह गई थीं। इंडियन नर्सिंग काउंसिल द्वारा निर्धारित योग्यता के अनुसार, सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए PCB (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) में न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए यह सीमा 40 प्रतिशत है।इसके साथ ही प्री नर्सिंग टेस्ट में सामान्य वर्ग के लिए 50 पर्सेंटाइल और आरक्षित वर्ग के लिए 40 पर्सेंटाइल अनिवार्य है। इन्हीं शर्तों के चलते बड़ी संख्या में योग्य माने जाने वाले छात्र भी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं।

छात्रों और कॉलेजों दोनों को राहत

अंतिम तिथि बढ़ने से जहां छात्रों को एक और मौका मिला है, वहीं नर्सिंग कॉलेजों को भी खाली सीटें भरने की उम्मीद जगी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीटें खाली रहती हैं, तो इसका सीधा असर नर्सिंग शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। ऐसे में यह फैसला छात्रों और संस्थानों—दोनों के लिए राहतभरा माना जा रहा है।

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