
दुर्ग। विश्व वानिकी दिवस (21 मार्च) के अवसर पर वानिकी महाविद्यालय दुर्ग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा ग्राम खमहरिया में विभिन्न जागरूकता एवं शैक्षिक कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अमित दीक्षित के निर्देशन में संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, वन संवर्धन को प्रोत्साहित करना एवं ग्रामीणों को सतत विकास के प्रति प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के लिए “वन और अर्थव्यवस्था” विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता से हुई, जिसमें ग्रामीण विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। इस माध्यम से बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया।
इस अवसर पर डॉ. आयुषी त्रिवेदी, डॉ. यामिनी बघेल, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरिश्चंद्र दर्रो, ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती सोनिया यदु, सरपंच प्रतिनिधि श्री थानेश्वर यदु, उपसरपंच श्री मनोज देशलहरे, डॉ. सत्यप्रकाश विश्वकर्मा, डॉ. एकता सिंह सहित NSS स्वयंसेवकों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित सीड बॉल कार्यशाला में प्रतिभागियों को बीज, मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से सीड बॉल बनाने की विधि सिखाई गई। वानिकी महाविद्यालय के शोधकर्ता साकेत कोसमा ने इसका व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए बताया कि इन सीड बॉल्स के माध्यम से बंजर भूमि पर भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण संभव है।
इसके साथ ही सर्पदंश रोकथाम कार्यशाला में शोधकर्ता खिलेश टेकाम ने ग्रामीणों को विषैले एवं अविषैले सर्पों की पहचान, बचाव उपाय, प्राथमिक उपचार एवं आपातकालीन सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी, जो ग्रामीणों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई।
कार्यक्रम में आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने वनों की घटती संख्या एवं उसके दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपने संबोधन में डॉ. आयुषी त्रिवेदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरिश्चंद्र दर्रो ने NSS की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए स्वयंसेवकों को सामाजिक कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने हेतु प्रेरित किया। वहीं सरपंच प्रतिनिधि श्री थानेश्वर यदु ने ग्रामीण स्तर पर वृक्षारोपण के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. यामिनी बघेल ने जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई तथा आयोजन में सहयोग करने वाले सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, ग्रामीणों एवं NSS स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
