
दुर्ग। पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती है, हमें सदैव उनका उपयोग करना चाहिए। पुस्तकों में ही जीवन का सार है। ये उद्गार पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के भूगर्भ अध्ययन शाला के सेवा निवृत्त प्राध्यापक डॉ. डी.पी. कुईती ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में व्यक्त किये। डॉ. कुईती ने आज भूगर्भशास्त्र विभाग को विषय से संबंधित लगभग 50 बहुमूल्य किताबें भूगर्भशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.डी. देशमुख को भेंट की। यह जानकारी देते हुए भूगर्भशास्त्र के प्राध्यापक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. कुईती ने अपने संबोधन में कहा कि वे साईस कालेज, दुर्ग के भूगर्भशास्त्र विभाग की उपलब्धियों से काफी प्रभावित है। यही कारण है. कि विद्यार्थियों को और अधिक ज्ञान प्राप्त हो. इस उद्देश्य से वे बहुमूल्य भूविज्ञान की किताबें भेंट कर रहे है। इनमें से कई किताबें ऐसी है. जिनका प्रकाशन बंद हो चुका है तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है।
डॉ. कुईती द्वारा भूगर्भशास्त्र विभाग को भेंट की गयी किताबों के संदर्भ में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि भूगर्भशास्त्र विभाग के विद्यार्थियों का चयन यूपीएससी, एमपीपीएससी, सीजीपीएससी, नेट, सेट गेट, एमईसीएल, स्टेट जियोलॉजी एवं माईनिंग विभाग तथा राज्य सरकार के माइनिंग इंस्पेक्टर आदि पदों पर बड़ी संख्या में हुआ है। इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में डॉ. डी.पी. कुईती द्वारा प्रदत्त पुस्तकें, मील का पत्थर सिध्द होंगी। भूगर्भशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.डी. देशमुख ने बताया कि आगामी चरण में डॉ. कुईती भूगर्भशास्त्र विभाग को शोध कार्य से संबंधित महत्वपूर्ण शोध पत्र-पत्रिकाएँ भेंट करेंगे, जिसका सीधा लाम विभाग के शोधार्थियों को मिलेगा। डॉ. देशमुख ने इस कार्य के लिए डॉ. कुईती को धन्यवाद दिया।
