दुर्ग लॉ कॉलेज विवाद: प्रिंसिपल ने दिल्ली में पेश किए 42 लाख रुपये जमा करने के सबूत

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दुर्ग/भिलाई | छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित और 62 साल पुराने कल्याण लॉ कॉलेज (दुर्ग) की मान्यता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने एक चौंकाने वाला नोटिस जारी कर कॉलेज के वर्ष 2011 से 2025 तक के हजारों छात्रों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की चेतावनी दी है। इस गंभीर स्थिति के बीच कॉलेज की प्रिंसिपल सुशीला यादव तत्काल दिल्ली पहुंचीं और BCI के समक्ष सभी दस्तावेज पेश कर अपना पक्ष रखा।

क्या है BCI का आरोप?

BCI ने अपने नोटिस में दो मुख्य आरोप लगाए हैं:

  •  कॉलेज ने छात्रों से BCI के नाम पर लिए गए प्रति छात्र 1600 रुपये (कुल लाखों की राशि) जमा नहीं किए हैं।
  •  कॉलेज ने निर्धारित अवधि के लिए आवश्यक मान्यता (Recognition) नहीं ली है।

मैनेजमेंट का पलटवार: “पैसे जमा हैं, सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं किया”

कॉलेज प्रबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रिंसिपल सुशीला यादव ने दिल्ली में पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि  वर्ष 2011 से 2025 तक की कुल बकाया राशि 42 लाख 60 हजार रुपये वर्ष 2023 में ही BCI के खाते में जमा कर दी गई थी।  कॉलेज के पास राशि जमा करने की रसीदें और बैंक दस्तावेज मौजूद हैं। प्रबंधन का दावा है कि BCI ने अपने ऑनलाइन सॉफ्टवेयर सिस्टम में जमा राशि और मान्यता की स्थिति को अपडेट नहीं किया, जिसके कारण यह भ्रम पैदा हुआ और नोटिस जारी कर दिया गया।

न्यायाधीशों और वकीलों में आक्रोश

1962 में स्थापित इस कॉलेज से पढ़कर निकले कई छात्र आज देश की विभिन्न अदालतों में न्यायाधीश (Judges) और वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। नोटिस की खबर फैलते ही पूर्व छात्रों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि इस एक नोटिस ने संस्थान की दशकों पुरानी साख को चोट पहुंचाई है, जबकि गलती पूरी तरह तकनीकी और प्रशासनिक प्रतीत होती है।

भिलाई में होगी प्रेस कॉन्फ्रेंस

प्रिंसिपल सुशीला यादव ने बताया कि उन्होंने BCI को हकीकत से रूबरू करा दिया है। वे जल्द ही भिलाई लौटकर मीडिया के सामने पूरे साक्ष्यों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी ताकि छात्रों और अभिभावकों के मन में उपजी शंकाओं को दूर किया जा सके।

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