दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में वाणिज्य विभाग के प्राध्यापक डॉ. हरजिंदर पाल सिंह सलूजा को लगभग 40 वर्षों की लंबी लासकीय सेवा के पश्चात् आज सेवानिवृत्ति पर महाविद्यालय परिवार एवं स्टॉफ क्लब द्वारा समारोह पूर्वक बिदाई दी गयी। यह जानकारी देते हुए स्टॉफ क्लब के प्रभारी डॉ. ज्योति धारकर ने बताया कि आज महाविद्यालय के राधाकृष्णन सभागार में आयोजित विदाई समारोह में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, अतिथि प्राध्यापकगण, कर्मचारी बंधु उपस्थित थे। अपने सम्मान के उत्तर में सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. एच.पी. सिंह सलूजा ने अपने 40 वर्ष के शासकीय सेवा काल के दौरान विभिन्न सस्मरणों तथा साथ में सेवा किये प्राचार्यों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियो का उल्लेख किया। डॉ. सलूजा ने कहा कि शासकीय सेवा निवृत्ति एक सतत् प्रक्रिया है. परंतु यदि व्यक्ति चाहे तो सेवा निवृत्ति के पश्चात् जीवन के दूसरे पहलुओं को जीत सकता है। डॉ. सलूजा ने अपने पारिवारिक सदस्यों तथा महाविद्यालय परिवार द्वारा दिए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए सभी को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम के संचालक प्रोफेसर सुदेश साहू ने बताया कि 1986 में तदर्थ सहायक प्राध्यापक के रूप में अपनी शासकीय सेवा आरंभ करने वाले डॉ. सलूजा ने साईंस कालेज, दुर्ग, वैशाली नगर कॉलेज, दुर्ग तथा शासकीय महाविद्यालय बिल्हा में अपनी सेवाएं दी। डॉ. सलूजा के मार्गदर्शन में 15 शोधार्थियों ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। अपने कार्यकाल के दौरान डॉ. एच.पी. सिंह सलूजा विश्वविद्यालय में वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता एवं चेयरमेन रहे। डॉ. सलूजा के बिदाई समारोह का आरंभ सरस्वती पूजन एवं स्वागत गान के साथ हुआ। सरस्वती वंदना अंग्रेजी की अतिथि प्राध्यापक डॉ. राजश्री नायडू तथा स्वागत गीत डॉ. स्वाति मेने ने प्रस्तुत किया। डॉ. ज्योति धारकर के संयोजकत्व में आयोजित बिदाई समारोह में प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने जामुल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. एस. सिंह एवं अन्य वरिष्ठ प्राध्यापकों की उपस्थिति में डॉ. सलूजा को श्रीफल, शॉल, स्मृति चिन्ह एवं पेंशन तथा ग्रेच्युटी से संबंधित आदेश पत्र सौंपे। महाविद्यालय के मुख्य लिपिक श्री संजय यादव के नेतृत्व में कार्यालयीन कर्मचारियों ने डॉ. सलूजा को श्रीफल, शॉल एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. सलूजा का सम्पूर्ण जीवन सादगी एवं मृदु व्यवहार के साथ बीता। उन्होंने डॉ. सलूजा से आग्रह किया कि महाविद्यालय को आवश्यकता होने पर वे सदैव सहयोग करें। डॉ. सलूजा की धर्मपत्नि डॉ. जगजीत कौर ने अपने संबोधन में डॉ. एच.पी. सिंह सलूजा के व्यक्तित्व एवं कर्तव्यपरायणता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उनके पुत्र श्री हिमेश सलूजा तथा पुत्र दधू शुभांगी सलूजा भी उपस्थित थे।
महाविद्यालय के के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एस.एन.झा ने प्रोफेसर सलूजा के साथ व्यतीत किए 16 वर्षों का स्मरण करते हुए एक रोचक गीत प्रस्तुत किया। डॉ. अभिनेष सुराना ने प्रोफेसर सलूजा को कर्तव्य के प्रति निष्ठावान बताया। अंग्रेजी की अतिथि प्राध्यापक डॉ. राजश्री नायडू ने ‘चलते चलते मेरे गीत याद रखना गाकर समूचे समारोह में उत्साह भर दिया। समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन भूगर्भशास्त्र के प्राध्यापक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने किया।


