
शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग की मनोविज्ञान विभाग की अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ. अनुराधा सहस्त्रबुध्दे को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा उनके एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत डिजाइन पोर्टेबल एजुकेशन डिवाइस फॉर आर्गेनाइजिंग स्टडी मटेरियल एण्ड असाइन्मेंट’ पर पेटेंट स्वीकृत किया गया है। यह पेटेंट भारत सरकार के डिजाइन अधिनियम 2000 तथा डिजाइन नियम 2001 के अध्यायधीन प्रावधानों के अनुसार स्वीकृत किया गया है। यह जानकारी देते हुए महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि भारत सरकार के महानियंत्रक पटेंट डिजाइन और व्यापार चिन्ह श्री उन्नत पी. पंडित द्वारा हस्ताक्षरित आदेश के मुताबिक डॉ. अनुराधा सहस्त्रबुध्दे एवं उनके 07 साथी शोधाकर्ताओं यह पटेंट स्वीकृत किया गया। डॉ. अनुराधा सहस्त्रबुध्दे द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार इस एजुकेशनल डिवाइस को विद्यार्थियों, शिक्षाविदों तथा प्रोफेशनलस को पाठ्य सामग्री, नोट्स तथा हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी में असाइन्मेंट आदि के एक्सेस करने के लिए बनाया गया है। यह डिवाइस बहुत ही हल्की, संगठित तथा संग्रहण हेतु विभिन्न खण्डों से युक्त, वायरलेस कनेक्टीविटी से युक्त है।
साईंस कालेज, दुर्ग में अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ. अनुराधा सहस्त्रबुध्दे एवं उनके साथियों द्वारा भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट स्वीकृत होने पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवा अतिथि सहायक प्राध्यापक द्वारा इस उपलब्धि से अन्य युवा प्राध्यापकों को भी प्रेरणा मिलेगी तथा महाविद्यालय में पेटेंट प्राप्ति के प्रति रूझान उत्पन्न होगा। उल्लेखनीय है, कि डॉ. अनुराधा सहस्त्रबुध्दे इससे पूर्व अपोलो कॉलेज, अंजोरा, दुर्ग तथा डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, भिलाई में अपनी सेवाएं दे चुकी है। वे श्रीकांत सहस्त्रबुध्दे की पत्नि है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी साईस कालेज, दुर्ग के प्राध्यापकों एवं शोधाकर्ताओं द्वारा विभिन्न विषयों पर 15 से अधिक पेटेंट प्राप्त किये जा चुके है, जिनमें देश एवं विदेश दोनों से स्वीकृत पेटेंट शामिल है। डॉ. अनुराधा सहस्त्रबुध्दे की सफलता पर मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. रचिता श्रीवास्तव ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
