देशभर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का कहर: 3,000 करोड़ की लूट, छत्तीसगढ़ में ही 32 करोड़ उड़ाए; सांसद बृजमोहन ने मांगा 24 घंटे का ट्रांजैक्शन होल्ड

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देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध ‘डिजिटल अरेस्ट’ के खतरे ने संसद तक सरगर्मी बढ़ा दी है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में इस मुद्दे को गंभीर रूप से उठाते हुए बताया कि यह ठगी अब तक 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा लोगों की जेब से साफ कर चुकी है। छत्तीसगढ़ में भी इस गिरोह ने पिछले तीन सालों में 32 करोड़ रुपए हड़प लिए।

सांसद बोले— मिनटों में उजड़ रही जिंदगीभर की कमाई

उन्होंने कहा कि ठग खुद को पुलिस, NIA या किसी केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं। वर्दी में दिखते हैं, नकली नोटिस दिखाते हैं और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर पैसों की जबरन ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करवा लेते हैं।
सबसे ज्यादा शिकार बुजुर्ग, अकेले रहने वाले नागरिक और तकनीक से कम परिचित लोग बन रहे हैं।

बड़ी रकम पर 24 घंटे की होल्डिंग व्यवस्था की मांग

सांसद बृजमोहन ने सुझाव दिया कि—

अगर किसी खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर हो, तो कम से कम 50% राशि को 24 घंटे के लिए रोक दिया जाए,
ताकि पीड़ित को ट्रांजैक्शन रोकने का मौका मिल सके।
उन्होंने कहा कि मौजूदा बैंकिंग सिस्टम इन संदिग्ध लेनदेन को भी सामान्य ट्रांजैक्शन की तरह प्रोसेस कर देता है, जबकि इसमें तत्काल सुरक्षा सुधार जरूरी हैं।

छत्तीसगढ़ में बढ़ रहे केस, 35 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार

राज्य में पिछले तीन सालों में डिजिटल अरेस्ट के 40 से अधिक मामले सामने आए हैं। रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, राजनांदगांव में कई लोग लाखों रुपए गंवा चुके हैं।
साइबर सेल ने अब तक 35 से ज्यादा आरोपियों को पकड़ा है। इनमें गुजरात, यूपी, झारखंड, दिल्ली और मध्यप्रदेश के आरोपी भी शामिल हैं। कई फर्जी कॉल सेंटर भी पकड़े गए, जो लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ बताकर घंटों तक वीडियो कॉल पर रखते और पैसे ट्रांसफर करवाते थे।

पीड़ितों के लिए जरूरी सावधानियां

किसी अंजान नंबर या कथित “अफसर” की धमकी से न घबराएं।

1930 या 155260 पर तुरंत कॉल करें।

cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

फर्जी लिंक, ऐप या संदिग्ध कॉल्स से दूरी बनाएं।

ठगी होते ही 1–3 घंटे के भीतर रिपोर्ट करें, पैसे रुकने की संभावना रहती है।

सरकार ने कार्रवाई का दिया आश्वासन

सांसद बृजमोहन ने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
केंद्र सरकार ने विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

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