रायपुर, 14 जुलाई 2025:
छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में मुख्य आरोपी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को ठुकरा दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच और दाखिल की गई 3,841 पन्नों की चार्जशीट में कई बड़े नाम सामने आए हैं, जिनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा भी शामिल हैं।
घोटाले की शुरुआत
आयकर विभाग ने 11 मई 2022 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ में रिश्वत और अवैध दलाली के खेल का खुलासा किया था। इसमें रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर पर अवैध वसूली का आरोप लगा। इसके आधार पर ED ने 18 नवंबर 2022 को PMLA एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
2161 करोड़ का अवैध कारोबार
ED की जांच में पता चला कि शराब घोटाले का दायरा 2161 करोड़ रुपये तक फैला हुआ है। इस मामले में 22 आबकारी अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया, जिन्हें हाल ही में निलंबित किया गया। इन अधिकारियों पर सिंडिकेट के जरिए 88 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप है।

चार्जशीट में बड़े खुलासे
ED ने 13 मार्च 2025 को स्पेशल कोर्ट में 3,841 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की। इसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनवर ढेबर, पूर्व IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा, तत्कालीन CM सचिवालय की उपसचिव सौम्या चौरसिया, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, और कई कंपनियां जैसे छत्तीसगढ़ डिस्टलर, वेलकम डिस्टलर, टॉप सिक्योरिटी, ओम सांई ब्रेवरेज, दिशिता वेंचर, भाटिया वाइन मर्चेंट और सिद्धार्थ सिंघानिया के नाम शामिल हैं।
भूपेश सरकार के कार्यकाल पर सवाल
यह घोटाला तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल से जुड़ा है, जिसमें शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज होने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है, और यह छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल का कारण बन गया है।
आगे की जांच और कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अनवर ढेबर को जेल में ही रहना होगा। ED इस मामले में गहन जांच जारी रखे हुए है, और अन्य आरोपियों के खिलाफ अगली कानूनी कार्रवाई का इंतजार है। इस मामले ने राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर कई सवाल खड़े किए हैं।