छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा होने के आरोपी आज़ाद हुसैन को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया है । अदालत ने कहा कि इस समय उन्हें गिरफ़्तारी से राहत देने का कोई कारण नहीं है।
हुसैन अपराध संख्या 55/2021 में ज़मानत मांग रहे थे , जिसमें आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत आरोप शामिल हैं। इस मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है, और जाँच शुरू होने के बाद से हुसैन कथित तौर पर फरार है।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि हुसैन निर्दोष है और उस पर गलत आरोप लगाया गया है, और बताया कि कुछ सह-आरोपियों को पहले ही ज़मानत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि गवाहों के बयानों से हुसैन की भूमिका साबित नहीं होती।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हुसैन ने जाँच में सहयोग नहीं किया और अधिकारियों से बचते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि धोखाधड़ी के दौरान हुसैन के खाते से 5,000 रुपये ट्रांसफर किए गए थे और एक अन्य आरोपी ने हुसैन का नाम इसमें सक्रिय भागीदार के रूप में लिया था।
न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपों और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया जाना उचित है। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और आवेदक के आचरण को देखते हुए अग्रिम ज़मानत खारिज करना उचित है।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने साइबर धोखाधड़ी मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया


