CG- छुट्टी में भी रेप पीड़िता के लिए खुला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, 25 सप्ताह के गर्भ पर अबॉर्शन की दी अनुमति

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विंटर वेकेशन के दौरान भी संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए 16 वर्षीय नाबालिग रेप पीड़िता को 25 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त कराने की अनुमति दी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया। गर्भपात रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जाएगा और भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

रायपुर 23 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट रेप पीड़िता के लिए छुट्टी के दौरान खुला। विंटर वेकेशन के बावजूद हाईकोर्ट ने एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दी। यह मामला 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़े दुष्कर्म का है, जो वर्तमान में 25 सप्ताह की गर्भवती है।

मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकलपीठ ने की। पीड़िता रायपुर की रहने वाली है, जिसकी ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगी गई थी। याचिका में बताया गया कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म हुआ था, जिसके चलते वह गर्भवती हो गई। गर्भावस्था की अवधि 20 सप्ताह से अधिक होने के कारण कानूनन गर्भपात के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक थी।

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सबसे पहले पीड़िता की चिकित्सकीय जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति का परीक्षण कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी। रिपोर्ट में बताया गया कि गर्भपात चिकित्सकीय रूप से संभव है और पीड़िता के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए गर्भावस्था जारी रखना उसके लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने गर्भपात की अनुमति दे दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि गर्भपात की प्रक्रिया पूरी तरह से विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में की जाए, ताकि पीड़िता की जान और स्वास्थ्य को किसी प्रकार का खतरा न हो। यह प्रक्रिया रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, जिसे आमतौर पर मेकाहारा अस्पताल कहा जाता है, में आज कराई जाएगी।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि गर्भपात के दौरान भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखा जाए। यह डीएनए भविष्य में आपराधिक मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अहम सबूत के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। कोर्ट का यह निर्देश दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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