छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा के दौरान अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में धार्मिक आस्था से जुड़ा विवादित प्रश्न सामने आने के बाद बड़ा बवाल मच गया। प्रश्न के विकल्प में “राम” नाम शामिल होने पर हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताते हुए शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।

School News : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सत्र 2025–26 की सरकारी स्कूलों की कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा उस समय विवादों में घिर गई, जब अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में धार्मिक आस्था से जुड़ा एक सवाल सामने आया। बुधवार को आयोजित परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया— “मोना (या मौना) के कुत्ते का क्या नाम है?”। इस प्रश्न के विकल्पों में “राम” नाम शामिल किए जाने को लेकर हिंदू समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों में तीव्र आक्रोश फैल गया।
जैसे ही प्रश्नपत्र की जानकारी सामने आई, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित अन्य हिंदूवादी संगठनों ने इसे भगवान राम की मर्यादा और करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया। संगठनों का कहना है कि भगवान राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और चेतना के प्रतीक हैं। ऐसे पवित्र नाम को एक जानवर से जोड़कर प्रश्नपत्र में शामिल करना अत्यंत निंदनीय और अस्वीकार्य है।
विवाद बढ़ने के बाद बुधवार को हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने महासमुंद शहर में रैली निकाली। पैदल मार्च करते हुए कार्यकर्ता जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय पहुंचे, जहां जमकर नारेबाजी की गई। इस दौरान डीईओ विजय कुमार लहरे के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उनका पुतला भी दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने मांग की कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर छपाई और वितरण तक से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए, उन्हें तत्काल निलंबित कर सेवा से बर्खास्त किया जाए। विश्व हिंदू परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जिलेभर में उग्र जनआंदोलन किया जाएगा।
इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग के भीतर जिम्मेदारी को लेकर खींचतान भी सामने आई है। प्रश्नपत्र सेट कराने की जिम्मेदारी एपीसी समग्र शिक्षा सैम्पा बोस को सौंपी गई थी। सैम्पा बोस का कहना है कि उन्होंने विशेषज्ञ समिति से प्रश्नपत्र तैयार कराया था और जो पीडीएफ उन्होंने भेजी थी, उसमें यह विवादित प्रश्न शामिल नहीं था। उनका दावा है कि उनके द्वारा भेजा गया प्रश्नपत्र अब तक कहीं भी छपा नहीं है।
वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने कहा कि विषय विशेषज्ञ से जो प्रश्नपत्र प्राप्त हुआ था, उसे प्रिंटिंग के लिए प्रकाशक आदेश श्रीवास्तव को भेजा गया था। डीईओ के अनुसार, जो प्रश्नपत्र छपकर वितरित हुआ, वह उनके द्वारा भेजा गया मूल प्रश्नपत्र नहीं है। दूसरी ओर, कृति ऑफसेट के संचालक आदेश श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें डीईओ कार्यालय से जो प्रश्नपत्र प्राप्त हुआ, उसी के आधार पर छपाई की गई थी।
मामले के तूल पकड़ने के बीच हिंदूवादी नेता विजय महतो ने कोतवाली थाने में आवेदन देकर जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज करने की मांग की है।
क्या बोले अधिकारी?
पूरे विवाद पर सफाई देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय मूल प्रश्न कुछ और था। प्रिंटिंग प्रेस स्तर पर तकनीकी या मानवीय त्रुटि के कारण वह प्रश्न हट गया और उसकी जगह दूसरा प्रश्न जुड़ गया। उन्होंने कहा कि विवादित प्रश्नपत्र को तत्काल निरस्त कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। डीईओ ने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

