
गुजरात। 2000 साल पुरानी तकनीक से बना जहाज INSV कौंडिन्य दिसंबर में पोरबंदर से ओमान के लिए रवाना होगा।
यह जहाज लकड़ी के तख्तों से तैयार किया गया है और नारियल की रस्सियों से सिला गया है, इसमें कहीं भी कीलों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। INSV कौंडिन्य में न तो इंजन है और न जीपीएस। इसमें चौकोर सूती पाल और पैडल लगाए गए हैं, जिससे यह पूरी तरह हवा की मदद से चलेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना करेंगे।
इस जहाज का नाम महान नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने हिंद महासागर पार करके दक्षिण-पूर्व एशिया तक की यात्रा की थी।
क्रू मेंबर्स ने महीनों तक विशेष प्रशिक्षण लिया है, क्योंकि आज इस तरह के जहाज को चलाने का अनुभव कम ही है। गोवा की एक कंपनी ने इसे 2000 साल पुरानी टांका पद्धति से तैयार किया। जहाज में चौकोर पाल, स्टीयरिंग बोर्ड, गंधभेरुंड और सूर्य की आकृतियां, नक्काशीदार शेर और हड़प्पा शैली का पत्थर का लंगर लगाया गया है।
संस्कृति मंत्रालय, नौसेना और होदी इनोवेशन ने मिलकर इस प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा किया। केरल के कारीगरों ने पारंपरिक कच्चे माल और तरीकों से हजारों जोड़ हाथ से सिले। फरवरी 2025 में इसे गोवा के होदी शिपयार्ड में लॉन्च किया गया।
INSV कौंडिन्य के निर्माण में पारंपरिक स्टीयरिंग मैकेनिज्म, लकड़ी के पुर्जे और सिले हुए पतवार का उपयोग किया गया है। पुराना ब्लूप्रिंट या अवशेष न होने के कारण डिजाइन करना चुनौतीपूर्ण था। इसके कारण यह जहाज दुनिया के किसी भी नौसैनिक जहाज से अलग है।
पहली समुद्री यात्रा के दौरान इसे पारंपरिक समुद्री ट्रेड रूट पर चलाया जाएगा। गुजरात से ओमान तक की इस यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। INSV कौंडिन्य भारतीय समुद्री इतिहास और प्राचीन जहाज निर्माण कौशल को प्रदर्शित करने का एक अद्वितीय प्रयास है।
