
Aug 29, 2025
रायपुर, 29 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कैबिनेट में 14 मंत्रियों की नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 164(1क) का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सीटों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है।

क्या है याचिका का आधार?
याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं, और संविधान के अनुसार, मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या 15 प्रतिशत यानी 13.5 से अधिक नहीं हो सकती। इसका मतलब है कि अधिकतम 13 मंत्रियों की नियुक्ति वैध है। हालांकि, साय कैबिनेट में हाल ही में तीन नए मंत्रियों की शपथ के बाद कुल मंत्रियों की संख्या 14 हो गई है, जो संवैधानिक सीमा से अधिक है। याचिकाकर्ता ने इस अतिरिक्त नियुक्ति को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।
कांग्रेस ने उठाया मुद्दा
कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर हाईकोर्ट के वकीलों से इस मुद्दे पर कानूनी सलाह ली है। कांग्रेस का कहना है कि साय सरकार ने संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की है। पार्टी यह तय करने की प्रक्रिया में है कि याचिका किसी विधायक या सामाजिक कार्यकर्ता के माध्यम से दायर की जाए। साथ ही, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्यपाल को पत्र लिखकर एक अतिरिक्त मंत्री को हटाने की मांग की है।
नए मंत्रियों की शपथ और विवाद
हाल ही में साय मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, जिसमें तीन नए मंत्रियों – गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब, और राजेश अग्रवाल – ने शपथ ली। इस विस्तार के बाद मंत्रियों की संख्या 14 हो गई, जिसने इस विवाद को जन्म दिया। याचिका में दावा किया गया है कि यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 164(1क) का उल्लंघन है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ सरकार से शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन क्यों किया गया और इस अतिरिक्त नियुक्ति को कैसे उचित ठहराया जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द होने की संभावना है, और सभी की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
इस याचिका ने छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल मचा दी है। कांग्रेस इसे सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश में है, जबकि भाजपा का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार पूरी तरह से नियमों के दायरे में किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह साय सरकार की छवि और प्रशासनिक निर्णयों पर असर डाल सकता है।