डोंगरगढ़ के करवारी बांस डिपो मैदान में 19 जून की रात घटित नृशंस लूटकांड ने समाज और सुरक्षा व्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया। एक दोस्त द्वारा रचे गए विश्वासघात की यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं, जिसमें असली खतरा “अपने” निकले।
असगर खान, जो अपने दोस्त नकीब खान के साथ बीयर पीने के बहाने बांस डिपो मैदान गया था, वहां पहले से साजिश रच चुके नकीब और उसके साथियों द्वारा लूट का शिकार बना। दो नकाबपोश आरोपियों ने खंजर की नोक पर असगर से नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और मोबाइल सहित ₹2,85,500 की संपत्ति लूट ली। आरोपियों ने फोन-पे से ₹98,000 का जबरन ऑनलाइन ट्रांजेक्शन भी कराया।
डोंगरगढ़ पुलिस को घटनास्थल पर मौजूद नकीब की गवाही में शुरू से ही विरोधाभास नजर आया। तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच और सख्त पूछताछ के बाद साजिश की परतें खुलती चली गईं। नकीब खान इस लूटकांड का मास्टरमाइंड निकला, जिसने अपने नाबालिग साथी और दो कुख्यात अपराधियों – पिंटू उर्फ हिरेंद्र सिन्हा एवं भरत बंसोड़ के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया।
पुलिस की तत्परता और सायबर सेल की तकनीकी विशेषज्ञता से महज 72 घंटों में पूरे मामले का सफल खुलासा कर दिया गया। लूट में प्रयुक्त दो खंजर, एक मोटरसाइकिल, एक्टिवा स्कूटी और ₹1,18,780 की संपत्ति जब्त कर ली गई है। साथ ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को भी फ्रीज कराया गया।
इस कार्रवाई में शामिल प्रमुख अधिकारीगण:
निरीक्षक जितेन्द्र वर्मा
उप निरीक्षक नरेश बंजारे
सहायक उप निरीक्षक विजय साहू
आरक्षक: आखिल अंबादे, वीर बहादुर, लीलाधर मण्डलोई, ऋषि मानिकपुरी, ओपी मोहरा, अविनाश झा, आदित्य सिंह
सायबर सेल: प्रख्यात जैन (तकनीकी विश्लेषक)
आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि:
नकीब खान – पूर्व में कई मामलों में लिप्त
पिंटू उर्फ हिरेंद्र सिन्हा – हत्या के गंभीर मामलों में नामजद
भरत बंसोड़ – बीएनएस की संगीन धाराओं में संलिप्त
यह घटना न केवल समाज को विश्वासघात की भयावहता से रूबरू कराती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि पुलिस की सजगता और तकनीकी दक्षता से कोई भी अपराधी कानून से बच नहीं सकता।