बिलासपुर |
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को निर्देश दिया है कि एक साल से अधिक समय से लंबित चार अलग-अलग राजस्व अपीलों का निराकरण 60 दिनों के भीतर किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल अपर आयुक्त का पद रिक्त होने के आधार पर मामलों को लंबित नहीं रखा जा सकता।
मामले में पेंड्रारोड निवासी मनीष पांडेय ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि पेंड्रा के तहसीलदार ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत अतिक्रमण करने वालों को बेदखल करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ कमिश्नर कार्यालय में अपील दायर की गई, लेकिन वर्ष 2024 से ये अपीलें लंबित पड़ी हुई हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि जिम्मेदार अधिकारी इन अपीलों पर अंतिम निर्णय नहीं ले रहे हैं, जिससे न्याय में अनावश्यक देरी हो रही है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि ये मामले अपर आयुक्त की कोर्ट में लंबित हैं और वर्तमान में यह पद खाली होने के कारण सुनवाई नहीं हो पा रही है।
इस पर जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार का तर्क खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि अपर आयुक्त का पद रिक्त है तो कमिश्नर को स्वयं इन मामलों को वापस मंगाकर सुनवाई करनी चाहिए थी।
हाई कोर्ट ने बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को आदेश की प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर सभी चारों अपीलों पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
राजस्व कोर्ट में लंबित अपीलें 60 दिनों में निपटाएं: हाई कोर्टअपर आयुक्त का पद खाली होने का तर्क नामंजूर


