
कबीरधाम (कवर्धा) जिले के पुलिस अधीक्षक और 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह छवई ने पदोन्नति में भेदभाव का गंभीर आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। यह पत्र 27 जनवरी 2026 को लिखा गया, जिसमें उन्होंने पुलिस मुख्यालय पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है।
पदोन्नति सूची में नाम होने के बावजूद नहीं मिला लाभ
धर्मेंद्र सिंह छवई वर्तमान में कबीरधाम जिले के पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी 10 अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025 की विभिन्न पदोन्नति सूचियों में उनका नाम डीआईजी (उप महानिरीक्षक) पद के लिए विचाराधीन रहा। इसके बावजूद उन्हें न तो डीआईजी पद पर प्रमोशन दिया गया और न ही प्रवर श्रेणी वेतनमान का लाभ मिला। छवई ने पत्र में उल्लेख किया है कि पुलिस मुख्यालय के परिशिष्ट ‘अ’ में उनकी संतोषजनक सेवा को प्रमाणित किया गया था, फिर भी लंबित जांच का हवाला देकर उन्हें पदोन्नति से वंचित रखा जा रहा है।
महादेव सट्टा ऐप मामले में नामित अधिकारियों को प्रमोशन
पत्र में महादेव बेटिंग ऐप घोटाले (अपराध क्रमांक 06/2024) का विशेष उल्लेख किया गया है। यह मामला पहले ईडी और अब सीबीआई जांच के अधीन है।
छवई का आरोप है कि इस प्रकरण में नाम आने के बावजूद कुछ आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नति और सेवा लाभ दिए गए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
•आनंद छाबड़ा
•प्रशांत अग्रवाल
•अभिषेक पल्लव
इन अधिकारियों के खिलाफ ईडी/आईओडब्ल्यू रायपुर में प्रकरण दर्ज है और जांच सीबीआई को सौंप दी गई है, इसके बावजूद उन्हें प्रमोशन मिला, जबकि उनके स्वयं के खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं है।
पुराने फोन टैपिंग मामले का भी दिया हवाला
धर्मेंद्र सिंह छवई ने अपने पत्र में फोन टैपिंग मामले (अपराध क्रमांक 06/2019 और 07/2019) का भी उल्लेख किया है। इस प्रकरण में 4 जुलाई 2024 को न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित अधिकारी को लाभ नहीं दिया गया, जबकि अन्य मामलों में जांच लंबित होने के बावजूद प्रमोशन दिया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से भेदभाव को दर्शाता है।
अनुच्छेद 16 के उल्लंघन का आरोप
छवई ने आरोप लगाया है कि यह पूरा मामला संविधान के अनुच्छेद 16 (समान अवसर का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है और पदोन्नति प्रक्रिया में समानता नहीं बरती जा रही। उन्होंने भारत सरकार के 15 जनवरी 1999 के पदोन्नति नियम (कंडिका 11) का हवाला देते हुए समान वेतनमान और न्याय की मांग की है।
गृह मंत्रालय और डीजीपी को भी भेजी गई प्रतियां
इस पत्र की प्रतियां केंद्रीय गृह मंत्रालय (नई दिल्ली) और छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई हैं। यह मामला न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस की पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बड़े घोटालों की जांच के दौरान विभागीय अधिकारियों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।


