पिता के बाद पुत्र ने भी तोड़ा दम, कांग्रेस नेता और उनके बेटे को हुई थी जेल, अब दोनों की हो गयी मौत, गुस्से में आदिवासी समाज

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सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष और कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर के निधन के ठीक एक सप्ताह बाद उनके बेटे नीरज ठाकुर की भी मौत हो गई है। पिता–पुत्र की लगातार मौतों ने पूरे आदिवासी समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है और अब एक बार फिर इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

कांकेर । जिले में बंद पिता और बेटे की लगातार मौत की यह घटना न सिर्फ दुखद है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जनपद पंचायत चारामा के पूर्व अध्यक्ष, कांग्रेस नेता और सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष जीवन ठाकुर का निधन 4 दिसंबर 2025 को रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में इलाज के दौरान हो गया था। उनके निधन के ठीक सात दिन बाद उनके बेटे नीरज ठाकुर की भी मौत की खबर सामने आई है।

दरअसल 12 अक्टूबर 2025 को कांकेर पुलिस ने जीवन ठाकुर और उनके बेटे नीरज ठाकुर को कथित तौर पर फर्जी वन पट्टा बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दोनों को पहले कांकेर जिला जेल में रखा गया, बाद में 2 दिसंबर 2025 को उन्हें कांकेर जिला जेल से रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया। रायपुर जेल में रहते हुए जीवन ठाकुर की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 4 दिसंबर को 49 वर्षीय जीवन ठाकुर का निधन हो गया

जीवन ठाकुर की मौत के बाद पूरे आदिवासी समाज में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। गुस्साए समाज के लोगों ने कार्रवाई की मांग को लेकर नेशनल हाईवे-30 को करीब छह घंटे तक जाम रखा और जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं, आदिवासी समाज ने बस्तर संभाग बंद का आह्वान कर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस व्यापक विरोध को देखते हुए छत्तीसगढ़ जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग के महानिदेशक ने कांकेर जिला जेल की सहायक जेल अधीक्षक रेणु ध्रुव को तत्काल प्रभाव से हटाकर केंद्रीय जेल, जगदलपुर में स्थानांतरित कर दिया था।

पिता की मौत के बाद नीरज ठाकुर को करीब एक सप्ताह बाद जेल से रिहा किया गया था। बताया जा रहा है कि पिता की मौत के सदमे से नीरज पहले से ही मानसिक रूप से काफी टूट चुके थे। अब उनकी भी मौत हो जाने से यह मामला और ज्यादा गंभीर हो गया है। फिलहाल नीरज ठाकुर की मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मौत के कारणों की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

लगातार हुई इन दो मौतों ने आदिवासी समाज में एक बार फिर शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। समाज के लोगों का कहना है कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे। वहीं प्रशासन पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए।

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