महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में दो कुलसचिवों* के विवाद को लेकर ABVP का आंदोलन, कुलपति से पांच बिंदुओं पर मांगा जवाब

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दुर्ग।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा आज महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के विरुद्ध आंदोलन किया गया। विश्वविद्यालय में एक ही समय पर दो कुलसचिव (Registrar) के कार्य करने के गंभीर विषय को लेकर ABVP ने कुलपति महोदय से पांच महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे।

विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि नवपदस्थ कुलसचिव आर.एल. खरे द्वारा विश्वविद्यालय के आधिकारिक रजिस्ट्रार ई-मेल आईडी का उपयोग करते हुए सभी विभागों को यह सूचना भेजी गई कि उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया है, जबकि शासन द्वारा विधिवत नियुक्त कुलसचिव यशवंत केराम पहले से पदस्थ हैं। ऐसे में परिषद ने सवाल उठाया कि वर्तमान कुलसचिव के रहते हुए कोई अन्य व्यक्ति रजिस्ट्रार की आधिकारिक ई-मेल आईडी का उपयोग कैसे कर सकता है।

ABVP ने यह भी आरोप लगाया कि आर.एल. खरे द्वारा कुलसचिव यशवंत केराम के केबिन पर जबरदस्ती कब्जा कर उनका नाम-पट्ट हटाकर स्वयं का नेम प्लेट लगाया गया। विद्यार्थी परिषद ने तत्काल नेम प्लेट हटवाई एवं यशवंत केराम को पुनः उनके मूल केबिन में बैठाया।

ABVP द्वारा कुलपति से पूछे गए पांच प्रमुख प्रश्न :

1. वर्तमान में विधिवत पदस्थ कुलसचिव के रहते हुए आर.एल. खरे द्वारा रजिस्ट्रार की आधिकारिक ई-मेल आईडी का उपयोग कैसे किया गया?

2. किस कर्मचारी द्वारा नेम प्लेट बदलकर कार्यालय परिवर्तन किया गया?

3. विश्वविद्यालय में वर्तमान में वैध कुलसचिव कौन है और किस कुलसचिव के आदेश व हस्ताक्षर मान्य माने जाएंगे?

4. कुलपति महोदय द्वारा अब तक राजभवन अथवा छत्तीसगढ़ शासन से इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश क्यों नहीं मांगे गए?

5. कुलसचिव यशवंत केराम को उनके कार्यालय से किस आधार पर हटाया गया, जबकि उन्हें हटाने संबंधी कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है?

ABVP ने स्पष्ट किया कि राजभवन द्वारा दिनांक 23/12/2024 को श्री रामलखन खरे को उनके मूल पद पर प्रतिस्थापित किया गया था। तत्पश्चात छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक 06/10/2025 को श्री यशवंत केराम को कुलसचिव पद पर नवीन पदस्थापना दी गई। वहीं दिनांक 02/01/2026 को राज्यपाल द्वारा जारी आदेश में आर.एल. खरे को प्रथम कुलसचिव के आदेशों का निर्माण करने का उल्लेख है, किंतु उस आदेश में वर्तमान पदस्थ कुलसचिव यशवंत केराम को हटाने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है। इस प्रकार विश्वविद्यालय में वर्तमान में दो कुलसचिवों की स्थिति बनी हुई है।

प्रदेश सह मंत्री श्री प्रथम राव फूटाने ने कहा—
“छत्तीसगढ़ में पहले से ही कई विश्वविद्यालय ऐसे हैं जहां स्थायी कुलपति और कुलसचिव नहीं हैं, लेकिन यह शायद देश का पहला विश्वविद्यालय है जहां एक ही समय में दो कुलसचिव कार्य कर रहे हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही अत्यंत निंदनीय है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि इस विषय को तत्काल स्पष्ट किया जाए और यह घोषित किया जाए कि विश्वविद्यालय का वैध कुलसचिव कौन है, जिससे शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।”*

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