मां की गोद से 15 दिन की मासूम को झपट कर कुएं में फेंका,डायपर’ ने लाइफ जैकेट बनकर बचाई जान!

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मां की गोद से 15 दिन की मासूम को झपट कर कुएं में फेंका,डायपर’ ने लाइफ जैकेट बनकर बचाई जान!

जांजगीर-चांपा | छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सिवनी गांव से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। यहाँ एक खूंखार बंदर ने ममता को लहूलुहान करते हुए एक मां की गोद से उसकी महज 15 दिन की नवजात बच्ची को छीन लिया और भागते हुए उसे पास के एक गहरे कुएं में फेंक दिया। लेकिन कहते हैं न कि ‘जिसकी रक्षा ईश्वर करे उसे कौन मारे’, मासूम की जान एक ‘डायपर’ की वजह से बच गई।

आंगन में बैठी मां से छीनी खुशियां

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मां अपने घर के आंगन में धूप में बैठी बच्ची को दुलार रही थी। तभी अचानक एक बंदर वहां पहुंचा और पलक झपकते ही बच्ची पर झपट्टा मारकर उसे मां की गोद से छीन लिया। मां कुछ समझ पाती या शोर मचाती, उससे पहले ही बंदर बच्ची को लेकर ऊँची दीवारों और छतों से होता हुआ पास के एक खुले कुएं तक पहुँच गया और उसे सीधे पानी में गिरा दिया।

देवदूत बनकर आए ग्रामीण, डायपर ने किया करिश्मा

मां की चीख पुकार सुनकर पूरा गांव इकट्ठा हो गया। ग्रामीण तुरंत कुएं की ओर भागे। जब कुएं में झांका गया तो बच्ची पानी के ऊपर तैरती हुई दिखाई दी। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और मासूम को सुरक्षित बाहर निकाला।

जान बचने की बड़ी वजह

बताया जा रहा है कि बच्ची ने ‘डायपर’ पहना हुआ था। डायपर के मटेरियल ने हवा को सोख लिया और पानी में एक ‘लाइफ जैकेट’ (Life Jacket) की तरह काम किया, जिससे 15 दिन की मासूम पानी में डूबी नहीं और सतह पर तैरती रही।

डॉक्टरों ने कहा- चमत्कार है यह!

कुएं से निकालने के बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसे कोई गंभीर अंदरूनी चोट नहीं आई है। समय रहते बाहर निकालने की वजह से उसे इंफेक्शन का खतरा भी टल गया। अस्पताल के स्टाफ और परिजनों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।

गांव में दहशत, वन विभाग से गुहार

इस घटना के बाद सिवनी गांव में बंदरों को लेकर जबरदस्त दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है और वे अब घरों के भीतर घुसकर हमला कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  •  हिंसक बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा जाए।
  •  गांव के खुले कुओं को जाली लगाकर सुरक्षित किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

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