
बिलासपुर, ।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 12वीं कक्षा के 19 वर्षीय छात्र अनूप बिशरा को महुआ शराब मामले में सशर्त जमानत दे दी है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा द्वारा 12 मार्च 2026 को पारित किया गया।
मामला महासमुंद जिले के सरायपाली थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पुलिस ने पूर्व सूचना के आधार पर छापा मारकर आवेदक के कथित कब्जे से 40 लीटर देसी महुआ शराब जब्त करने का दावा किया था। इसके बाद छात्र के खिलाफ छत्तीसगढ़ उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया।
बचाव पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि छात्र को झूठा फंसाया गया है और जब्त शराब से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि शराब की बरामदगी घर के पीछे खुले स्थान से हुई, जहां कई लोग मौजूद थे, जिससे “कब्जे” का आरोप संदिग्ध हो जाता है। साथ ही जब्ती प्रक्रिया और शराब की माप को लेकर भी सवाल उठाए गए।
बोर्ड परीक्षा को लेकर दी गई राहत
अदालत को बताया गया कि आवेदक 12वीं का छात्र है और उसकी बोर्ड परीक्षाएं 16 मार्च से 8 अप्रैल 2026 के बीच निर्धारित हैं। साथ ही उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह 22 फरवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में था।
राज्य ने किया विरोध
राज्य पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभी आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ है और जब्त शराब की मात्रा अधिक है, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
अदालत ने किन आधारों पर दी जमानत
मामले की डायरी और दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि आवेदक की कम उम्र, आपराधिक इतिहास का अभाव, शिक्षा जारी रहने का पहलू और ट्रायल में लगने वाला समय उसके पक्ष में हैं।
जमानत की प्रमुख शर्तें
अदालत ने छात्र को निम्न शर्तों के साथ जमानत दी—
गवाहों की उपस्थिति में सुनवाई टालने का प्रयास नहीं करेगा
तय तारीखों पर निचली अदालत में उपस्थित रहेगा
जमानत का दुरुपयोग नहीं करेगा
आरोप तय करने और बयान दर्ज करने जैसे महत्वपूर्ण चरणों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेगा
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन शर्तों का पालन करते हुए आवेदक को नियमित जमानत पर रिहा किया जाए, ताकि वह अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग कर सके।

