जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में जमीन विवाद ने एक खौफनाक रूप ले लिया। नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम भैंसदा में एक युवक ने जमीन को लेकर हुए विवाद में एक महिला पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस वारदात का लाइव वीडियो सामने आया है, जिसमें हमलावर की क्रूरता साफ नजर आ रही है। घायल महिला की हालत गंभीर बनी हुई है, और उसे बिलासपुर सिम्स रेफर किया गया है। वहीं, आरोपी घटना के बाद से फरार है।
घर में घुसकर किया हमला
घटना 16 जुलाई की रात की है। पीड़िता अनिता सूर्यवंशी (35 वर्ष) अपने पति के साथ अपने घर में थीं। तभी आरोपी हितेंद्र तरुण (29 वर्ष) ने दरवाजा खटखटाया और अंदर घुसते ही अनिता पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमलावर ने महिला के सिर पर कई वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। अनिता के पति ने पहले से ही कैमरा ऑन कर लिया था, जिसके चलते इस खौफनाक घटना का दो मिनट का वीडियो रिकॉर्ड हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि हितेंद्र दोनों को धमकाते हुए हमला करता है और अनिता को लहूलुहान कर देता है।

जमीन विवाद बना हमले की वजह
बताया जा रहा है कि इस वारदात के पीछे जमीन विवाद मुख्य कारण है। पीड़ित परिवार ने अपनी जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी थी, जबकि हितेंद्र उस जमीन को खरीदना चाहता था। जमीन न मिलने से नाराज हितेंद्र ने पहले भी कई बार पीड़ित परिवार को धमकाया था। इस बार उसने अपनी नाराजगी को बर्बरता में बदल दिया और अनिता पर जानलेवा हमला कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई और आरोपी की तलाश
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल अनिता को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिलासपुर सिम्स रेफर कर दिया। जांजगीर-चांपा के SP विवेक पांडेय ने बताया कि आरोपी हितेंद्र तरुण के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन हितेंद्र और उसका परिवार घर में ताला लगाकर फरार है।
क्षेत्र में दहशत का माहौल
इस घटना के बाद भैंसदा गांव में दहशत का माहौल है। लाइव वीडियो सामने आने से लोगों में आक्रोश भी देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन विवाद को लेकर पहले भी तनाव की स्थिति थी, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। अब पुलिस ने आरोपी को जल्द पकड़ने का आश्वासन दिया है।
पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है और वीडियो फुटेज को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यह घटना जमीन विवादों को सुलझाने में प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक संवेदनशीलता की कमी को भी उजागर करती है।