
धमतरी, 28 मई 2026। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र में तेंदुए के हमले से एक ग्रामीण की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। कोरमुड़ गांव निवासी 55 वर्षीय चौथराम मंडावी का क्षत-विक्षत शव बुधवार सुबह पहाड़ी इलाके में मिलने से ग्रामीणों में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
शौच के लिए निकले थे, वापस नहीं लौटे
जानकारी के अनुसार चौथराम मंडावी मंगलवार शाम घर से शौच के लिए निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। बुधवार सुबह गांव के पास पहाड़ी क्षेत्र में उनका शव क्षत-विक्षत हालत में मिला। शव का एक हाथ और एक पैर गायब था, जबकि पेट बुरी तरह फटा हुआ था। घटनास्थल पर शव को घसीटकर ले जाने के निशान भी दिखाई दिए।
तेंदुए के हमले की आशंका
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह हमला तेंदुए ने किया है। कोरमुड़ गांव घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जहां तेंदुए और भालू जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी आम बात है। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी और जंगल में पानी व शिकार की कमी के कारण वन्यजीव अब गांवों की ओर आने लगे हैं।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। कुछ समय पहले इसी क्षेत्र में तेंदुए ने घर के आंगन में खेल रहे एक मासूम बच्चे को भी अपना शिकार बनाया था। लगातार बढ़ती घटनाओं से ग्रामीणों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ गई है।
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि विभाग की लापरवाही के कारण वन्यजीव गांवों के आसपास खुलेआम घूम रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ा जाए, वन कर्मियों की गश्त बढ़ाई जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई। विभाग ने दावा किया है कि क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जा रही है और तेंदुए की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। साथ ही ग्रामीणों को जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में अकेले न जाने तथा शाम के बाद विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
क्षेत्र में दहशत का माहौल
घटना के बाद कोरमुड़ सहित आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीण अब शाम होते ही घरों में रहने को मजबूर हैं। लोगों ने प्रशासन से वन्यजीवों के बढ़ते आतंक पर जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की है।

