हाई कोर्ट ने फांसी की सजा को प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास में बदला

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दुष्कर्म और हत्या के दोषी को राहत, कोर्ट बोला- “सिर्फ अपराध की गंभीरता से नहीं दी जा सकती मृत्युदंड”

बिलासपुर, 13 मई 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के एक चर्चित मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी युवक की फांसी की सजा को बदलकर प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया है। विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा की पुष्टि के लिए मामला हाई कोर्ट पहुंचा था, वहीं दोषी ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि मृत्युदंड केवल “दुर्लभतम से दुर्लभ” मामलों में ही दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि दोषी के सुधार की संभावना पूरी तरह समाप्त हो चुकी है या वह भविष्य में समाज के लिए स्थायी खतरा बना रहेगा।

कोर्ट ने कही यह अहम बात

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर किसी आरोपी को फांसी की सजा नहीं दी जा सकती। सजा तय करते समय अदालत को आरोपी के सुधार, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार करना जरूरी होता है। इसी आधार पर कोर्ट ने फांसी की सजा को बदलते हुए दोषी को प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

जंगल में ले जाकर किया था दुष्कर्म और हत्या

जांच में सामने आया था कि आरोपी महिला को धोखे से सुनसान जंगल क्षेत्र में ले गया। वहां उसने महिला पर हमला कर उसे बेहोश कर दिया और उसी अवस्था में उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी ने गला घोंटकर महिला की हत्या कर दी। पूछताछ के दौरान आरोपी ने वारदात स्वीकार भी की थी।

यह था पूरा मामला

मामला सक्ति जिला के डभरा थाना क्षेत्र का है। पीड़िता बेमेतरा जिला स्थित परिवार न्यायालय में प्यून के पद पर कार्यरत थी। अगस्त 2022 में वह छुट्टी पर अपने गांव आई हुई थी। 14 अगस्त को वह घर से बेमेतरा जाने की बात कहकर स्कूटी से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी।

अगले दिन परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच के दौरान महिला के परिचित युवक पर संदेह हुआ। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से पता चला कि आरोपी महिला को अपनी स्कूटी पर सुनसान पालगढ़ा घाटी की ओर ले गया था और कुछ देर बाद अकेले लौट आया।

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