1952 की जमीन बिक्री वैध, हाईकोर्ट ने खारिज की दूसरी अपील

Spread the love

बिलासपुर |

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायगढ़ जिले के बैकुंठपुर स्थित 70 साल पुराने भूमि विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दूसरी अपील (सेकंड अपील) को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालतों के तथ्यात्मक निष्कर्षों में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

क्या है मामला

यह मामला मनोरंजन प्रसाद पांडेय द्वारा दायर दूसरी अपील से जुड़ा है। अपीलकर्ता ने वर्ष 1952 में किए गए रजिस्टर्ड बिक्री विलेख (सेल डीड) को निरस्त करने और जमीन पर स्वामित्व का दावा किया था। उनका कहना था कि यह भूमि उनके दादा अभयराम पांडेय की थी, जिन्होंने सामाजिक उद्देश्य से ‘बापू आश्रम’ निर्माण के लिए गौरीशंकर शास्त्री के पक्ष में नाम मात्र की कीमत पर जमीन रजिस्ट्री की थी।

अपीलकर्ता का तर्क था कि चूंकि आश्रम का निर्माण कभी नहीं हुआ, इसलिए उक्त बिक्री विलेख को शून्य घोषित किया जाना चाहिए।

प्रतिवादियों का पक्ष

प्रतिवादियों ने दावा किया कि वर्ष 1952 की रजिस्ट्री पूर्णतः वैध थी और विधिवत मूल्य लेकर की गई थी। इसमें किसी प्रकार की बाध्यकारी शर्त नहीं थी। साथ ही, जमीन पर उनका वर्षों से कब्जा और स्वामित्व बना हुआ है।

निचली अदालतों का निर्णय

ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय न्यायालय दोनों ने बिक्री विलेख को वैध माना और अपीलकर्ता के दावे को खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि बिक्री का उद्देश्य आश्रम निर्माण था और दस्तावेजों की गलत व्याख्या की गई है। हालांकि, न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने कहा कि सेकंड अपील केवल “महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न” (Substantial Question of Law) के आधार पर ही स्वीकार की जा सकती है। इस मामले में ऐसा कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता।

अदालत का फैसला

अदालत ने अपने आदेश में कहा—

  • 1952 का बिक्री विलेख वैध है
  • आश्रम निर्माण का उल्लेख बाध्यकारी शर्त नहीं था
  • वसीयत के समय जमीन पहले ही बेची जा चुकी थी, इसलिए उस पर अधिकार नहीं बनता
  • केवल आश्रम न बनने के आधार पर बिक्री को अवैध नहीं ठहराया जा सकता

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता केवल साक्ष्यों की पुनः जांच चाहता है, जो सेकंड अपील में संभव नहीं है।

इसी आधार पर अदालत ने दूसरी अपील को प्रारंभिक चरण (एडमिशन स्टेज) में ही खारिज कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?