
रायपुर।
राजधानी रायपुर स्थित नंदनवन पक्षी विहार अब पर्यटकों के लिए नए आकर्षणों के साथ विकसित किया जाएगा। नंदनवन में जल्द ही 50 फीट से लेकर 150 फीट तक की जिपलाइन सुविधा शुरू की जाएगी, वहीं प्राकृतिक वातावरण के बीच बोटिंग का आनंद भी लोग उठा सकेंगे। इसके साथ ही परिसर में मिलेट्स कैफे की भी शुरुआत की जाएगी।
नंदनवन पक्षी विहार का संचालन अब जंगल सफारी प्रबंधन से हटाकर रायपुर वनमंडल को सौंप दिया गया है। यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से पूरी की गई। हाल ही में वन मंत्री केदार कश्यप और क्षेत्रीय विधायक राजेश मूणत ने नंदनवन का निरीक्षण किया था, जिसके बाद इसके पुनर्विकास के निर्देश दिए गए।
रायपुर वन मंडलाधिकारी लोकनाथ पटेल ने बताया कि नंदनवन के विकास के लिए शुरुआती तौर पर 30 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। इस राशि से जिपलाइन, बोटिंग के लिए नए बोट्स, पक्षियों के बाड़ों में सुधार और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
पक्षियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान
नंदनवन में वर्तमान में एमू, मटककली कबूतर, सिल्वर पिजन, गोल्डन पिजन और ऑस्ट्रेलियन स्काई ब्लू पैरेट सहित कई देशी-विदेशी पक्षी मौजूद हैं। इनमें मेल-फीमेल पक्षियों के अनुपात में असंतुलन सामने आया है, जिसे समान करने की योजना बनाई गई है। भविष्य में कुछ नए पक्षियों को भी नंदनवन में शामिल किया जाएगा।
पर्यटकों को बेहतर बर्ड-वॉचिंग अनुभव देने के लिए केज के फ्रंट में ग्लास लगाए जाएंगे, ताकि बिना बाधा पक्षियों को नजदीक से देखा जा सके।
मिलेट्स कैफे होगा आकर्षण
नंदनवन परिसर में मिलेट्स कैफे भी शुरू किया जाएगा, जहां स्थानीय व्यंजनों के साथ-साथ नॉर्थ और साउथ इंडियन फूड उपलब्ध रहेगा। प्रबंधन का दावा है कि भोजन की दरें किफायती रखी जाएंगी, ताकि आम लोग भी इसका लाभ ले सकें।
चूहों की समस्या का होगा समाधान
नंदनवन में चूहों की बढ़ती संख्या एक गंभीर समस्या बनी हुई थी। चूहों के कारण दाना चुगने के दौरान कई विदेशी पक्षियों की मौत भी हो चुकी है। अब इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नंदनवन के विकास के साथ-साथ आसपास के स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा। कई परिवार नंदनवन पर निर्भर हैं, ऐसे में उनके हितों का संरक्षण प्राथमिकता में रहेगा।
वन मंत्री ने नंदनवन को आधुनिक सुविधाओं के साथ एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे यह स्थान न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि पर्यटन और रोजगार का भी केंद्र बन सके।

