जजों के सर्विस रूल में बड़ा बदलाव, पदोन्नति व आरक्षण व्यवस्था में हुआ संशोधन, जानिये क्या हुआ बदलाव

Spread the love

छत्तीसगढ़ में न्यायिक सेवा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विधि एवं विधायी विभाग ने हाई कोर्ट की अनुशंसा पर हायर ज्यूडिशियल सर्विस (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 2006 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए पदोन्नति के मानदंड, भर्ती कोटा, मूल्यांकन प्रणाली और दिव्यांग आरक्षण से जुड़े प्रावधानों में व्यापक बदलाव किए हैं।

 

रायपुर 29 जनवरी 2026। विधि एवं विधायी विभाग ने हायर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स में बड़ा बदलाव करते हुए न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति और आरक्षण व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित किया है। इस संबंध में संशोधित नियमों की अधिसूचना जारी कर दी गई है, जो हाई कोर्ट की अनुशंसा के बाद लागू की गई है। इन बदलावों का उद्देश्य न्यायिक सेवा में गुणवत्ता, जवाबदेही और समान अवसर को और मजबूत करना बताया जा रहा है।

नए संशोधित नियमों के अनुसार अब ज्यूडिशियल सर्विस में पदोन्नति के मानदंड पहले की तुलना में अधिक सख्त कर दिए गए हैं। सिविल जज (जूनियर और सीनियर कैटेगरी) को पदोन्नति के लिए अब कम से कम सात वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य होगा। पहले यह अवधि अपेक्षाकृत कम थी। वहीं, किसी पद पर बने रहने की न्यूनतम समय-सीमा को पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया है, जिससे योग्य अधिकारियों को समय पर आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

हायर ज्यूडिशियल सर्विस में भर्ती कोटा से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां विभिन्न श्रेणियों के लिए 65 प्रतिशत और 10 प्रतिशत का प्रावधान था, अब उसे संशोधित कर क्रमशः 50 प्रतिशत और 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव को संतुलित भर्ती व्यवस्था की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण संशोधनों में दिव्यांगों के लिए आरक्षण का स्पष्ट और विस्तृत प्रावधान शामिल है। नए नियमों के तहत दिव्यांगों के लिए कुल चार प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं। इसमें दृष्टिबाधित और अल्प दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए एक प्रतिशत, श्रवण बाधित (बधिर को छोड़कर) के लिए एक प्रतिशत तथा चलने में निशक्तता, कुष्ठ रोग मुक्त, बौनापन, तेजाब हमला पीड़ित और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित उम्मीदवारों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है। इसके अलावा आप्टिज्म और बहुदिव्यांगता के लिए भी एक प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है। यदि किसी भर्ती वर्ष में दिव्यांग उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं, तो यह पद अगले भर्ती वर्ष में आगे बढ़ाए जाएंगे।

पदोन्नति के लिए मूल्यांकन प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ बनाया गया है। कुल 100 अंकों के मूल्यांकन में दिए गए फैसलों का मूल्यांकन 30 अंक, पिछले पांच वर्षों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) 10 अंक, मामलों के निपटारे की दर 10 अंक, विजिलेंस रिपोर्ट 10 अंक, कानून के अद्यतन ज्ञान के आधार पर 10 अंक, सामान्य धारणा, जागरूकता और संचार कौशल 10 अंक तथा साक्षात्कार के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं।

अधिसूचना के अनुसार सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक 60 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग, जिसमें दिव्यांग भी शामिल हैं, के लिए 50 प्रतिशत तय किए गए हैं। पात्र और सफल उम्मीदवारों को मेरिट के आधार पर 1:3 के अनुपात में साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?