विभागीय जांच के बिना शिक्षकों की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट की रोक

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बिलासपुर।
विभागीय जांच कराए बिना शिक्षकों को बर्खास्त किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। न्यायमूर्ति पी.पी. साहू की एकलपीठ ने ईश्वरी निर्मलकर सहित छह याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए संबंधित शिक्षकों के बर्खास्तगी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
प्रकरण के अनुसार, याचिकाकर्ता ईश्वरी निर्मलकर की नियुक्ति वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मगरलोड द्वारा शिक्षा कर्मी वर्ग-3 के पद पर की गई थी। पूर्व में उनकी नियुक्ति को लेकर पारित बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगाते हुए उनकी सेवा नियमित की गई थी। इसके पश्चात वर्ष 2009 से 2018 के बीच याचिकाकर्ता का समायोजन स्कूल शिक्षा विभाग में शासकीय सेवक के रूप में किया गया तथा वर्ष 2023 में उन्हें प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक के पद पर पदोन्नत किया गया।
इसी बीच वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ राज्य लोक आयोग में की गई शिकायत के आधार पर वर्ष 2011 में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई थी। लंबे समय बाद वर्ष 2025 में पूरक चालान प्रस्तुत कर याचिकाकर्ता को अभियुक्त बनाया गया, जबकि प्रकरण का ट्रायल अभी न्यायालय में लंबित है।
याचिकाकर्ता द्वारा आरोपों से इनकार करते हुए जवाब प्रस्तुत किया गया, इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी, धमतरी ने 6 जनवरी 2026 को आदेश पारित कर उन्हें शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने अपने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, अरिंदम मित्रा एवं श्रद्धा मिश्रा के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया विभागीय जांच के अभाव में बर्खास्तगी को अनुचित मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पारित 6 जनवरी 2026 के बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी है तथा संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
अगर चाहें तो मैं इसे और संक्षिप्त, हेडलाइन-फोकस्ड, या किसी विशेष अखबार की स्टाइल (दैनिक भास्कर/नवभारत/हरिभूमि) में भी ढाल सकता हूँ।

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