दोहरे हत्याकांड के आरोपी की रिहाई का हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Spread the love

बिलासपुर। दोहरे हत्याकांड के आरोपी मनोज अग्रवाल की रिहाई का आदेश छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने अंडर सेक्रेटरी जेल द्वारा पारित आदेश को निरस्त करते हुए यह निर्णय सुनाया। मनोज अग्रवाल की ओर से उनके अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
याचिका में बताया गया कि परिवीक्षा पर रिहाई के लिए दिए गए आवेदन को अंडर सेक्रेटरी जेल ने 1 मई 2025 के आदेश से निरस्त कर दिया था, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य परिवीक्षा बोर्ड की सिफारिश को ही स्वीकार कर लिया गया था।
डिवीजन बेंच ने कहा कि बोर्ड की बैठक के कार्यवृत्त के अवलोकन से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता की परिवीक्षा याचिका को मुख्यतः अपराध की गंभीरता एवं उसके विरुद्ध दर्ज तीन कारावास अपराधों के आधार पर अस्वीकार किया गया।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता के अतिरिक्त याचिकाकर्ता की परिवीक्षा याचिका को अस्वीकार करने का कोई वैध कारण नहीं है। जहां तक कारावास अपराधों का प्रश्न है, वर्ष 2018 के बाद याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई नया कारावास अपराध दर्ज नहीं है। ऐसे में वर्ष 2013 से 2018 के बीच दर्ज अपराध वर्तमान में परिवीक्षा याचिका को खारिज करने का वैध आधार नहीं बन सकते।
पांच शिक्षकों की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ईश्वरी निर्मलकर सहित पांच अन्य याचिकाओं में बर्खास्तगी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
मामले के अनुसार, ईश्वरी निर्मलकर की नियुक्ति वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मगरलोड द्वारा शिक्षा कर्मी वर्ग-3 के पद पर की गई थी, जिसे वर्ष 2009 में नियमित किया गया। वर्ष 2018 में उनकी पोस्टिंग स्कूल शिक्षा विभाग में शासकीय सेवक के रूप में हुई तथा वर्ष 2023 में उन्हें प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक पद पर पदोन्नत किया गया।
वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ राज्य लोक आयोग में की गई शिकायत के आधार पर वर्ष 2011 में एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में वर्ष 2025 में पूरक चालान प्रस्तुत कर याचिकाकर्ता को अभियुक्त बनाया गया, जबकि मामला अभी ट्रायल में लंबित है।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने के आरोप में जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी द्वारा याचिकाकर्ता को शो-कॉज नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा गया। जवाब प्रस्तुत किए जाने के बावजूद 6 जनवरी 2026 को बर्खास्तगी का आदेश पारित कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, अरिंदम मित्रा एवं श्रद्धा मिश्रा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?