बिलासपुर | हाई कोर्ट ने डीपी विप्र कॉलेज प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए एक कर्मचारी की बर्खास्तगी को अवैध ठहराया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि कॉलेज प्रबंधन ने कर्मचारी को सेवा से हटाते समय अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया। डीपी विप्र कॉलेज में बुक लिफ्टर पद पर कार्यरत अरुण कुमार कश्यप की सेवाएं प्रबंधन ने 2 फरवरी 2008 को समाप्त कर दी थीं। इस आदेश के खिलाफ कर्मचारी ने उच्च शिक्षा विभाग के समक्ष अपील की थी। अपीलीय प्राधिकारी ने जांच के बाद बर्खास्तगी को रद्द कर दिया था। कॉलेज प्रबंधन ने इस फैसले को पहले हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में चुनौती दी, लेकिन वहां भी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद प्रबंधन ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। कॉलेज की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं मिला, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘अधिनियम 1978’ और ‘नियम 1983’ के तहत गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी के कारण सेवा समाप्ति आदेश को कोर्ट ने कानूनन गलत माना और सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा।

