बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अलग-अलग मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी किया है, वहीं एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को राहत और एक शिक्षिका को नियुक्ति दिलाने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के इन तीन अहम आदेशों ने प्रशासनिक जवाबदेही, कर्मचारी अधिकार और चयन प्रक्रिया में न्याय को रेखांकित किया है।
तहसीलदार रायगढ़ को अवमानना नोटिस
आदेश की अवमानना के मामले में हाईकोर्ट ने रायगढ़ तहसीलदार शिव कुमार डनसेना को नोटिस जारी किया है। मामला अवैध निर्माण और गलत सीमांकन से जुड़ा है। रायगढ़ जिले के ग्राम तमनार निवासी प्रदीप कुमार गुप्ता ने अपने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के माध्यम से याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि ग्राम जगतपुर, रायगढ़ स्थित उनकी भूमि (पटवारी हल्का नंबर 14, प्लाट नंबर 59/3 व 59/4, कुल रकबा 11 डिसमिल) का सीमांकन अवैध रूप से कर कॉलोनाइजर को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने 2 जनवरी 2024 को कलेक्टर रायगढ़, तहसीलदार और एसडीओ को निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच करें और अवैध कब्जा पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करें। आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट ने इसे अवमानना मानते हुए तहसीलदार को नोटिस जारी किया है।
सीआईडीसी के रिटायर कैशियर को राहत
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीआईडीसी) के सेवानिवृत्त कैशियर/अकाउंटेंट ओ.पी. ठाकुर को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें तीन दिनों के भीतर सरकारी आवास खाली करने के लिए जारी नोटिस पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करें और इस पर निर्णय होने तक उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। मामला सेवानिवृत्ति देयकों से जुड़े विवाद से संबंधित है, जिसे लेकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
शिक्षिका को सेवा में लेने का आदेश, अवमानना याचिका निराकृत
हाईकोर्ट ने स्नातक और बीएड योग्यता के बावजूद चयन से वंचित की गई महिला शिक्षिका के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें सेवा में लेने का आदेश दिया था। शासन द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर दिए जाने के बाद दायर अवमानना याचिका को कोर्ट ने निराकृत कर दिया।
मामला वर्ष 2019 में बस्तर जिले के जगदलपुर में शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ता श्रीमती जगजीत कौर भाटिया को यह कहकर चयन से बाहर कर दिया गया था कि उन्होंने बीएड के बाद स्नातक किया है। कोर्ट में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका स्नातक पहले ही पूरा हो चुका था और बाद में अंग्रेजी साहित्य में श्रेणी सुधार के लिए दोबारा स्नातक किया गया था।
जस्टिस अमितेश किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने माना कि याचिकाकर्ता चयन मानदंडों को पूरा करती हैं और विभाग का आदेश गलत है। कोर्ट ने 60 दिनों के भीतर नियुक्ति का आदेश दिया था, जिसे बाद में पूरा कर लिया गया।
इन तीनों मामलों में हाईकोर्ट के आदेशों से यह स्पष्ट है कि न्यायालय प्रशासनिक मनमानी पर सख्त है और पात्र अभ्यर्थियों व कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।



