शिक्षकों को सरकार दे मोबाइल, तब चलायेंगे APP: “VSK ऐप पर शिक्षक भड़के, कहा, ‘निजी मोबाइल में सरकारी निगरानी मंज़ूर नहीं, सड़कों पर उतरने की चेतावनी

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छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) मोबाइल ऐप लागू करने के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं शिक्षक संगठनों ने इसे निजता का हनन बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है और आंदोलन की चेतावनी दी है।
 

रायपुर, 20 दिसंबर 2025।छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल निगरानी को और मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) मोबाइल ऐप के जरिए शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस संबंध में सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर वीएसके ऐप के माध्यम से अटेंडेंस को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

ऑनलाइन अटेंडेंस से नहीं, जबरन ऐप से आपत्ति
सरकार के इस फैसले के साथ ही शिक्षकों के बीच असंतोष भी तेजी से उभरकर सामने आया है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने वीएसके ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज कराने को निजता का उल्लंघन बताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र राठौर और संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष केदार जैन ने संयुक्त बयान जारी कर सरकार के इस निर्णय को अस्वीकार्य बताया है।

शिक्षकों का विरोध: “निजी मोबाइल में सरकारी निगरानी मंजूर नहीं”
शिक्षक नेताओं का कहना है कि साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच निजी मोबाइल फोन में इस तरह के ऐप को डाउनलोड कराना शिक्षकों की गोपनीयता के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। रविंद्र राठौर ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध ऑनलाइन अटेंडेंस से नहीं है और न ही वे निगरानी से डरते हैं, लेकिन वे अपने निजी मोबाइल में सरकारी ऐप डाउनलोड करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू करना चाहती है, तो शिक्षकों को सरकारी मोबाइल या टैबलेट उपलब्ध कराए।

पायलट प्रोजेक्ट पर भी उठे सवाल
राठौर ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि सात जिलों में वीएसके ऐप का पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में यह प्रयोग किया गया, वहां कुल शिक्षकों में से महज 10 प्रतिशत ने ही ऐप डाउनलोड किया था। ऐसे में इसे सफल प्रयोग बताना शिक्षकों को गुमराह करने जैसा है।

“पहले ही मोबाइल में 10 से ज्यादा ऐप, अब एक और”
वहीं संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष केदार जैन ने कहा कि शिक्षा विभाग पहले ही शिक्षकों के मोबाइल में 10 से अधिक अलग-अलग ऐप डाउनलोड करवा चुका है और अब एक और नए ऐप को अनिवार्य किया जा रहा है। उन्होंने इसे “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जैन ने सुझाव दिया कि यदि निगरानी करनी ही है तो अधिकारियों के माध्यम से स्कूलों का निरीक्षण कराया जाए और मैनुअल मॉनिटरिंग की जाए, न कि साइबर जोखिम बढ़ाने वाले प्रयोग किए जाएं।
आंदोलन की चेतावनी: ऐप का होगा बहिष्कार
शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने वीएसके ऐप के जरिए ऑनलाइन अटेंडेंस के आदेश को वापस नहीं लिया, तो प्रदेशभर के शिक्षकों की संयुक्त बैठक बुलाकर बड़े आंदोलन और ऐप के बहिष्कार का ऐलान किया जाएगा।दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन इस फैसले को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बताते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम बता रहे हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार, वीएसके को पहले सात जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया था, जहां सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसके बाद अब इसे प्रदेश के सभी 33 जिलों में लागू कर दिया गया है।

ऐप कैसे करेगा काम
वीएसके ऐप के तहत शिक्षक स्कूल परिसर के 100 मीटर के दायरे में रहकर अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे। इसके अलावा इस ऐप के जरिए मध्याह्न भोजन योजना, विद्यार्थियों की उपस्थिति, पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति, विभागीय नोटिस और शैक्षणिक योजनाओं की निगरानी भी की जाएगी। सरकार का दावा है कि बिग डेटा एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के जरिए शिक्षा व्यवस्था की कमजोर कड़ियों की पहचान कर उन्हें दुरुस्त किया जाएगा।फिलहाल, वीएसके ऐप को लेकर छत्तीसगढ़ में सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है और क्या कोई बीच का रास्ता निकल पाता है या यह मामला बड़े आंदोलन का रूप लेता है।

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