
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पुलगांव में स्थित बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर कटघरे में है। 28 नवंबर की रात यहां से 7 नाबालिग अपचारी एक साथ फरार हो गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 बच्चों को खोज निकाल लिया, लेकिन 3 बालक अब भी लापता हैं। जानकारी यह भी सामने आई है कि यह बच्चे जिले की सीमाओं से बाहर निकल चुके हैं, जिसकी पुष्टि पुलिस स्तर पर अभी नहीं की गई है।
लगातार दूसरी घटना, व्यवस्थाओं की पोल खोली
यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है। ठीक 26 दिन पहले, 3 नवंबर को भी इसी संप्रेक्षण गृह से 3 नाबालिग फरार हुए थे। मात्र एक महीने में दूसरी बार हुई यह घटना सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है। विभागीय दावों के बावजूद लगातार हो रही इन घटनाओं ने अधिकारियों की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
दीवार फांदकर भागना बना आसान रास्ता
जांच में सामने आया है कि बच्चे पीछे के हिस्से से दीवार फांदकर बाहर निकल जाते हैं। पुलिस का कहना है कि हर बार बच्चों के भागने के बाद उन्हें ढूंढने में संसाधन और समय दोनों खर्च होते हैं, लेकिन संप्रेक्षण गृह प्रबंधन इस समस्या को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा।
4 बच्चे मिले, बाकी 3 की तलाश जारी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने रात में ही खोजबीन शुरू की। आसपास के इलाकों में तलाश के दौरान 4 नाबालिग मिल गए, जिन्हें फिर से संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है। वहीं 3 बच्चे अब भी फरार हैं और उनके जिले से बाहर जाने की आशंका जताई जा रही है।
अधिकारियों से संपर्क विफल
घटना पर जानकारी लेने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी और संबंधित अधिकारीयों को कई बार फोन किया गया, लेकिन किसी ने भी कॉल रिसीव नहीं की। इससे विभागीय संवेदनशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्न
लगातार हो रही ऐसी घटनाएं संकेत दे रही हैं कि संप्रेक्षण गृह में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर है। नाबालिगों के गंभीर अपराधों में शामिल होने के चलते उनकी निगरानी में ढिलाई किसी बड़ी घटना का कारण बन सकती है।
